बसंत पंचमी को माता सरस्वती पूजा की समय, महत्व एवं विधि

भारत में लगभग सभी जगह पे सरस्वती देवी की पूजा की जाती है, सरस्वती पूजा की शुरुवात, सरस्वती प्रतिमा की स्थापना साथ सभी ज्ञानवर्धक पुस्तकों को पूजा के लिए एक साथ रखा जाता है| पूजा के लिए खुद के घर में या किसी स्कूल में या किसी मंदिर में मूर्ति के अश्थापना और और पूजा किया जाता है | इस पूजा में बिद्यार्थि के साथ सभी लोग बहुत खुश होते है, क्यूंकि इस समय कुछ बच्चे के परीक्षा के तैयारी लगे रहते है तो और कुछ बच्चे की पढाई से छुट्टी मिल जाती है| ऐसे ही छोटे बच्चों को पहली बार लिखना सिखाया जाता है, इसके बाद उनका किसी स्कूल में दाखिला कराया जाता है|

माता सरस्वती पूजा

भारत के अलावे कुछ दूसरे देश में भी जैसे नेपाल, म्यांमार, जापान, कंबोडिया, थाईलैंड एवं इण्डोनेशिया में भी सरस्वती पूजा होती है.

सरस्वती माता विद्या एवम संगीत की देवी कही जाती हैं. यह श्वेत वस्त्र धारण करती हैं. इनका वाहन हंस हैं इनके हाथों में वीणा, पुस्तक, कमल एवम माला हैं. यह ज्ञान की देवी हर मनुष्य को बुद्धि प्रदान कर सकती हैं. यह स्वभाव से अत्यंत कोमल हैं. माँ शारदा, विद्या दायिनी, वागेश्वरी, वाणी आदि कई नामों से इन्हें पुकारा जाता हैं|

बसंत पंचमी की तारीख:
10 फरवरी 2019

बसंत पंचमी के दिन सरस्वती माता की पूजा का महत्व:

माता सरस्वती का जन्म बसंत पंचमी के दिन हुआ था, इसलिए इस दिन इनकी पूजा का महत्व सभी पुराणों में मिलता हैं, इस समय भी सरस्वती पूजा का महत्व होता हैं. बसंत पंचमी को माता सरस्वती का पूजन किया जाता हैं.
सूर, संगीत एवम कला के प्रेमी सरस्वती माता का पूजन बड़े उत्साह एवं उल्लास से करते हैं. माता सरस्वती की पूजा से मनुष्य में ज्ञान का विकास होता हैं. इन्ही की कृपा से मनुष्य बंदर योनी से इन्सान बना. मनुष्य में सभ्यता का विकास हुआ. माँ सरस्वती ब्रह्मा जी की अर्धागनी कहलाती हैं, जिन्होंने श्रृष्टि की रचना की और उसी सुंदर श्रृष्टि में देवी सरस्वती ने ज्ञान, कला एवम सभ्यता का विकास किया.

सरस्वती पूजा विधि:

आवश्यकता होती है. सुबह नहाते समय पानी में नीम और तुलसी मिलानी चाहिए.
प्रातःकाल में स्नान से पूर्व शरीर पर हल्दी और नीम का लेप लगाना चाहिए. इससे शरीर पूरी तरह शुद्ध हो जाता है, और अब स्नान के बाद सफेद या पीला कपड़ा पहनना चाहिए.
जिस स्थान पर पूजा करनी हो, वहाँ साफ कर लें और उसे माला, फूल आदि से सजा लें और माँ की प्रतिमा स्थापित करें.
प्रतिमा स्थापित करने के बाद दवात को दूध से भर दें और उसमे लकड़ी का एक कलम रखें. साथ ही अपनी कुछ किताबें और यदि कोई वाद्य यंत्र हो तो माँ के चरणों के पास रख दें.
अब एक ताम्र पात्र में कलश स्थापना करें. इसमें आम्र-पल्लव रखें और उसपर नारियल रख दें. यदि संभव हो तो आम्र पल्लव के ऊपर एक पान का पत्ता भी समर्पित करें.
हर पूजन कर्म की तरह माँ सरस्वती की पूजा में भी आप भगवान गणेश की मूर्ति रख सकते हैं, इससे भगवान गणेश की पूजा का भी फल प्राप्त होगा.
मूर्ति स्थापना के बाद आप दीपक प्रज्ज्वलित करें और माँ के सामने रखें, इसके बाद धूप जला कर माँ को दिखाएँ.




धूप दीप दिखा देने के बाद हाथ में अक्षत, रोली आदि लेकर माँ के चरणों में समर्पित करें. दूर्वा भगवान गणेश को चढ़ाएं.
इसके बाद फल- प्रसाद आदि भगवान के सामने रखें. ध्यान रखें कि आपके पास पाँच बिन कटे फल भी होने चाहिये, ये फल ही माँ सरस्वती को चढ़ते है, साथ ही पंचामृत भी अर्पित करें.
इसके उपरान्त हाथ में पुष्प ले कर प्रार्थना करें और पहले भगवान गणेश के चरणों पर इसे समर्पित करें और इसके बाद माँ सरस्वती के चरणों पर. इस समय एक विशेष वंदना की जाती है, जिसे सरस्वती वंदना कहते है.

सरस्वती वंदना:

माँ शारदे कहा तू विणा बजा रही हो ,
किस मंजू ज्ञान से तू ,जग कोलुभा रही हो |
किस भाव में भवानी तू मग्न हो रही हो ,
विनती यही हमारी ,माँ क्योंन सुन रही हो |
हम दिन बाल कबसे विनती सुनारहे है ,
चरणों में तेरी माता ,हम शीश नवा रहे है |
अज्ञानता हमारी माँ शीघ्र दूर करदे ,
सद्बुद्धि ज्ञान हममे ,माँ शारदे तू भर दे |
मातेश्वरी तू सुन ले ,इतनी विनय हमारी ,
करके दया तू हर दे ,बाधा जगतकी सारी |
माँ शारदे कहा तू विना बजा रही हो ,
किस मंजू ज्ञान से तू ,जग कोलुभा रही हो |

सरस्वती माँ शायरी:

ज़माने भर की याद में मुझे ना भुला देना,
जब कभी याद आये तो ज़रा मुस्कुरा लेना,
ज़िंदा रहे तो फिर मिलेंगे,
वर्ना बसंत पंचमी में एक पतंग मेरे नाम का भी उड़ा लेना।

ज़िन्दगी गर
दोराहे से गुजरती है
वो चौखट ही है तेरी माँ
जहां यह दिल सुकून पाता है

पीले पीले सरसों के फूल,
पीली उड़े पतंग,
रंग बरसे पीला और छाये सरसों सी उमंग।
आपके जीवन में रहे सदा बसंत के रंग।

सहस शील हृदय में भर दे
जीवन त्याग से भर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे
माँ सरस्वती आपके जीवन में उल्लास भर दे!

महफ़िल सजती हैं
चराग़ रोशन होते हैं
हम तेरे बिना
ज़िन्दगी में अधूरे
अधूरे से होते हैं
कैसे कहें माँ
हर पल बस तेरे ही
ख़यालों में डूबे रहते हैं
जीवन की कश्ती
एक तेरे ही भरोसे
हम सागर में तरते हैं

वीणा लेकर हाथ में,
सरस्वती हो आपके साथ में,
मिले मां आर्शीवाद आपको हर दिन,
हर वार हो मुबारक बसंत पंचमी का त्यौहार,

माता तेरे चरणों मे
भेंट हम चढ़ाते हैं
कभी नारियल तो
कभी फूल चढ़ाते हैं
और झोलियाँ भर भर के
तेरे दर से लाते हैं

किस्से कहानी
बन जाएंगे हम भी कभी
रहमत है तेरी माँ
पास होती है तू
तो जीने में जुनून आता है

कैसे कहूँ की
जी नहीं सकता
माँ तेरी कृपा बिना
मेरा जीवन जीवन नहीं
माँ तेरी श्रद्धा बिना

सोचा करता था माँ
तेरी कृपा बिना
कैसे ज़रूरते होंगी पूरी
तेरा आशीर्वाद
मिला जो माँ
तो नही रही
कोई हसरत अधूरी

सहस शील हृदय में भर दे,
जीवन त्याग से भर दे,
संयम सत्य स्नेह का वर दे,
माँ सरस्वती आपके जीवन में उल्लास भर दे।

लेके मौसम की बहार,
आया बसंत ऋतू का त्योहार,
आओ हम सब मिलके मनाये,
दिल में भर के उमंग और प्यार

विद्या दायिनी, हंस वाहिनी माँ भगवती
तेरे चरणों में झुकाते शीष हे देवी
कृपा कर हे मैया दे अपना आशीष
सदा रहे अनुकम्पा तेरी रहे सदा प्रविश

श्वेताम्बर हैं जिसका
हंस हैं वहाँ जिसका
वीणा, पुराण जो धारण करती
ऐसी माँ शारदा मैं करू तेरी भक्ति

कमल पुष्प पर आसीत माँ
देती ज्ञान का सागर माँ
कहती कीचड़ में भी कमल बनो
अपने कर्मो से महान बनो

तू स्वर की दाता हैं,
तू ही वर्णों की ज्ञाता.
तुझमे ही नवाते शीष,
हे शारदा मैया दे अपना आशीष.

बिन बुलाए भी जहां
जाने को जी चाहता है
वो चौखट ही है तेरी माँ
जहां यह बंदा सुकून पाता है

सरस्वती पूजा का यह प्यारा त्यौहार,
जीवन में खुशी लाएगा अपार,
सरस्वती विराजे आपके द्वार,
शुभकामनाएं हमारी करें स्वीकार।

माँ जब भी तुझको पुकारा है
बिन मांगे सब पाया है
ए माँ मेरी गुनाहों को
मेरे मैं कुबूल करता हूँ
मोक्ष दे दे मेरी माँ
बस यही आशा रखता हूँ

किताबों का साथ हो,
पेन पर हाथ हो,
कोपिया आपके पास हो,
पढाई दिन रात हो,
जिंदगी के हर इम्तिहान में आप पास हो।