जरती माई | जरती माता मंदिर महाराजगंज सिवान | Jarti Mata Mandir Maharajganj Siwan

सिवान शहर के महराजगंज में प्रसिद्ध जरती माता मंदिर स्थित है|जरती  माई की पूजा बिशेष रूप से सोमबार और शुक्रबार होती है लेकिन यहाँ हर दिन माता जी की पूजा अच्छी तरीके से होती है| ये जरती माता जी का मंदिर बहुत प्रशिध्य है और सभी भक्तो का मानना है की जरती माता जी की पूजा जो व्यक्ति दिल से करता है उनकी हर एक मन्नत पूरी होती है| इसलिए बिसेष रूप से  माता जी के पास लोग मन्नत मांगने जाते हैं और उनका चढ़ावा या पूजा पुरे धूम धाम से चढ़ाते है|

Jarti Mayi Maharajganjहमारे देश में शक्ति की पुजा सर्वत्र की जाती है़ ऐसे ही हमारे छोटे से शहर महाराजगंज के इंदौली गांव के दक्षिण-पश्चिम के कोने पर गंडकी नहर के किनारे जरती माता जी की मंदिर है़ । जहां 12 महीने दर्शनार्थियो और भक्तो की भीड़ लगी रहती है । श्रद्घालु जरती माता जी को मन्नतों का खजाना पूरी करने वाली माता जी मानते हैं|



अब हम आपको बता देते है की माता रानी कब और कहां से आयी यहाँ पे :

सीवान जिले के एक बड़े शहर महाराजगंज के इंदौली गांव के सिंदुआर परिवार के साधक झपसी सेंदुआर तंत्र-मंत्र की जानकारी के लिए 18 वीं सदी के उतरार्ध में असम के कौड़ी कामाख्या से मन्त्र सिद्घी के बाद साधक झपसी सेंदुआर जरती माई का एक पिंडी १० दशक पूर्व लाए थे़। झपसी के परिवार में लोगों की संख्या ज्यादे थी़ तो उनमे से तत्काल साधक ने पिंडी को घर में रख था़ लेकिन उनकी पूजा पाथ और साफ सफाई भी नहीं हो प् रही थी। देवी माता जी अपनी अनादर होते देख नाराज हो गयी और  झपसी का पुरा परिवार का नाश हो गया़।  गांव के कुछ लोगों ने जरती माई की पिंड गांव से बाहर रखने की सलाह झपसी को  दी़ । 19वीं सदी के पूर्वाद्घ में झपसी ने जरती माता जी को गांव के बाहर जंगल में रख कर पूजा पाठ करनी शुरु कर दी़|
Jarti Mata Mandir Maharajganj उस जंगल में जाकर जिसने भी माता जी की श्रद्घा से पूजा की उसकी मनोकामना पूरी होने लगी़| यह देख श्रद्घालुओं ने जंगल में एक कुंआ खुदवाया़ जहा से पानी लेकर श्रद्घालु पूजा-पाठ करने लगे। कई अमीर, गरीब और सहूकारों की मन्नत पूरी होने पे सबने मिलकर माता का मंदिर बनवाना चाहा, लेकिन सफल नहीं हो पाए़। माता रानी खुले आसमान के निचे रहना पसंद करती थी़ इसलिए मंदिर नहीं बन प् रहा था ये माता रानी आपने सेवक के सपने में सुचना दी थी| फिर माता जी का पूजा खुले आसमान के निचे होने लगा लेकिन चारो साइड से मंदिर का आकर दे दिया गया है | कुछ समय बाद झपसी के मृत्यु हो गयी उसके उपरांत विशुनपुरा गांव के हरखु दास औघड़ पंथी ने माता जी की पूजा पाठ की कमान संभाली थी़।




कब हुवा मंदिर का निर्माण :

1990 में महाराजगंज के तत्कालिक एसडीपीओ अरविंद ठाकुर के मनोकामना पूरी होने पे उनके मन में श्रद्घा जगी और जनता के सहयोग से मंदिर निर्माण का कार्य हुआ। आज जरती माई के भब्य मंदिर के साथ धर्मशाला व शंकर भागवान, महावीर मंदिर आदि का निर्माण हो चुका है़। जरती माता मंदिर के कार्य और उसका देख रेख एक स्थायी संचालन समिति द्वारा किया जाता है़ । जिसके प्रथम अध्यक्ष स्थनीय एसडीओ, उपाध्यक्ष एसडीपीओ रहते हैं और बाकी सदस्य शहर के गणमान्य लोग रहते हैं।

माता से अपनी मन्नत मांगने और पूजा करने दूर-दराज से आते हैं श्रद्घालु :



श्रद्घालु जरती माई के दरबार में माथा टेकने अपनी राज्य बिहार के कुछ शहर से  और उसके नजदीक के गांव से लोग आते है| इसके अलवाये दूसरे राज्य से भी जैसे बंगाल, असाम, यूपी, मध्यप्रदेश, राजस्थन, नेपाल आदि से आते है, माता उनकी मन्नतें पूरी करती है़ । बिशेष कर माता के दरबार में दशहरा में बहुत भीड़ उमड़ती है़ । जरती माई मंदिर के संचालन समिति श्रद्घालुओं द्वारा दान किए गऐ पैसे, गहने आदि को एकठ्ठा कर मां के दरबार में धर्मशाला आदि का निर्माण व मंदिर का मरम्मत कराते हैं। मंदिर को भब्य तरिके से सजाया रहता है़। दशहरा में श्रद्घालुओं की इतनी भीड़ होती है , कि मंदिर के आस-पास का वातावरण जय मां की जयघोष से गूंजते रहता है़ । श्रद्घालु अष्टयाम् कीर्तन भी कराते रहते हैं।

जरती माईसुरक्षा की व्यवस्था भी कड़ी रहती है :

समिति के तरफ से तो नौजवानों की टीम सुरक्षा में रहती ही है इसके अलावे इसके स्थानीय प्रशान की भी चौकसी नजर रहती है़ । दूर दराज से आये दर्शनार्थियों के लिए ठहरने की पुख्ता व्यवस्था समिति के द्वारा की जाती है|